धरा झूम रही है
काव्य और कविताएं

धरा झूम रही है !

देखो धरा झूम रही है, मतवाली सी गा रही है नरतन करती गा रही है देखो धरा झूम रही है।   खेत खलिहान सब नाच रहे हैं वह किसान खुश रो रहा है अबकी फसल होनी है बडिया लाऊँगा  सोने की लडियाँ, बेटी की विदाई है होनी, अबकी फँसी नहीं लगानी, देखो धरा झूम रही […]

गायब हो रही है लोक कलायें
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गायब होती लोक कलायें !

गायब हो रही है लोक कलायें,कहॉ गयी दादरा, ठुमरी, चैती, दादरा, होरी, और जाने कितनी चीजें, जिसको सुन लो मन खुश हो जाता हैं, जो कुछ जीवन में सीखा जाती है। कहॉ गयी कहॉ गये वह भजन गजल की शाम ,कहॉ गये? वह जिन को सुनकर हन लोग बडे हुये, बडा ही दुख का विषय […]

बलिदान या घुटन ?
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बलिदान या घुटन ?

आज श्री बहुत खुश थी, शादी के बाद यह उसका पहला जन्मदिन था। वह अपने पति से कुछ आश्चर्य की उम्मीद कर रही थी। लेकिन श्री पति सत्या के दिमाग में कुछ और ही योजना चल रही थी। उन्होंने श्री का जन्मदिन मनाया लेकिन अपनी इच्छा के अनुसार। उन्होंने अपने सभी दोस्तों और श्री के […]

तू ही तू
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तू ही तू

मेरी मंजिल तू ही तू मेरी महफिल तू ही तू तू पकड़ ले हाथ जो मेरा मेरा साहिल भी तू ही तू मेरी पहचान तू ही तू मेरा सम्मान तू ही तू तू मेरा क्या लागे यारा  है मेरी जान भी तू ही तू मेरा एहसास भी तू ही तू मेरा खास भी तू ही […]

जख्म
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प्रिया प्रिंसेस राजपूत की कलम से 2 कविता

मरहम अपने जख्मों पे लगा लेते खुद ही जमाना तो “प्रिया” नमकीन बहुत है।   मुरली वाणी राधा राधा बोले प्रेम जीवन सत्य यही भेद खोले प्रेम को न कोई मोल तोले प्रेम-अनमोल धुन मुरली ‘प्रिया’ बोले।   जी रही हूँ या दर्द का जहर पी रही हूँ   कैसे ये अपने जो दर्द का […]

पावनता 
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पावनता 

नहर का नीला पानी लगा मुझे चिरयात्री आया पहाड़ों से चलता रहा है निर्बाध थकान भी नहीं है ऊबा भी नहीं सफर से जाना भी है बहुत दूर चला जा रहा है चुपचाप गतिशीलता ने रखी है महफूज इसकी पावनता अगर ये कहीं ठहर जाता किसी तालाब में तो खो देता अपनी पावनता     […]

ज़िन्दगी के सफर में
काव्य और कविताएं

ज़िन्दगी के सफर में

खुदा इस पापी पर अपना करम रखना, ज़िन्दगी के सफर में थोड़ा सा मरम रखना,   गरूर-ओ-तकबीर मेरी ज़िन्दगी में ना आये, अपनी दया से मेरा दिल नरम रखना,   लालच-ओ-हवस मेरे करीब ना आने पाये, मेरी आँखों मे सदा हया-ओ-शरम रखना,   हर इम्तिहान में मुझे साबित क़दम रखना, सिर्फ इंसानियत मेरा दीन-ओ-धरम रखना, […]

उड़ान बुजुर्गों से
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बुजुर्गों से

मिला है सुंदर रंगों का, ज्ञान बुजुर्गों से। और मिली है पंखों में, उड़ान बुजुर्गों से। ये तो अपने परिवारों की आधारशिलाए हैं,  मिली पीढ़ियों की हम को, पहचान बुजुर्गों से॥    हमको मिलते सुंदर, संस्कार बुजुर्गों से। हमने पाया घर समाज, परिवार बुजुर्गों से। बिन मां बाप के अपना, अस्तित्व नहीं कोई, मिला संस्कृति […]

शहर
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शहर

न सहर है  न शाम है। काफिर की पिटाई सरेआम है॥   न दंगे है न लड़ाई है। हमारे शहर में कत्लेआम है॥   न दोस्त हैं न दुश्मन है। फिर ये कैसा इंतकाम है॥   न भजन है न आज़ान है। हमारी बस्ती में कोहराम है॥   न सुख है न सुविधा है। हमारे […]

दिवानगी
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दिवानगी

किसी के दिल का नगमा हमसे रुठ जाता है, मनाये हम जब उसको फिर वो मान जाती है। कैसे बतलाऊ उसको हमे तुम्हारी खबर है, मगर आज कल मुझसे वो बेखबर रहती है॥   किसी के दिल कि मदहोशी हमे बेहोश करती है, खुलते है राज जब हमें वो खामोश करती है। हमने किया था […]