तू ही तू
काव्य और कविताएं

तू ही तू

मेरी मंजिल तू ही तू

मेरी महफिल तू ही तू

तू पकड़ ले हाथ जो मेरा

मेरा साहिल भी तू ही तू

मेरी पहचान तू ही तू

मेरा सम्मान तू ही तू

तू मेरा क्या लागे यारा

 है मेरी जान भी तू ही तू

मेरा एहसास भी तू ही तू

मेरा खास भी तू ही तू

तू मुझसे दूर है लेकिन

मेरी हर सांस में तू ही तू

मेरी राहों में तू ही तू

मेरी चाहों में तू ही तू

मेरा दिल तोड़ने वाले

मेरी आहो में तू ही तू

मेरी खुशियों में तू ही तू

मेरे गम में भी तू ही तू

भुलाऊं कैसे मैं तुझको

मेरे पल छिन में तू ही तू

मेरी सुबह शाम तू ही तू

मेरा अंजाम तू ही तू

राधा रानी मैं तेरी

मेरा घनश्याम तू ही तू

मेरे दिल में तू ही तू

मेरी जान में तू ही तू

                                                                                 – विभा जैन, धार, मध्य प्रदेश

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