बलिदान या घुटन ?
काव्य और कविताएं

बलिदान या घुटन ?

आज श्री बहुत खुश थी, शादी के बाद यह उसका पहला जन्मदिन था। वह अपने पति से कुछ आश्चर्य की उम्मीद कर रही थी। लेकिन श्री पति सत्या के दिमाग में कुछ और ही योजना चल रही थी। उन्होंने श्री का जन्मदिन मनाया लेकिन अपनी इच्छा के अनुसार। उन्होंने अपने सभी दोस्तों और श्री के परिवार को भी आमंत्रित किया। श्री अपने जन्मदिन पर एक रोमांटिक कैंडल लाइट डिनर के लिए जाना चाहती थी लेकिन वह पूरी शाम मेहमानों के लिए रात के खाने की तैयारी में व्यस्त थी। श्री के माता-पिता सहित हर कोई सत्य की तारीफों के पुल बांध रहा था कि सत्य ने अपनी पत्नी के लिए इस तरह की पार्टी आयोजित करी हैं, किसी को भी श्री और उसकी मेहनत दिखाई नही दी जिसने अपने जन्मदिन का पूरा दिन और शाम इतने सारे लोगों के लिए रात के खाने की तैयारी में लगा दिया.श्री को अंदर से घुटन महसूस हो रही थी, वो एक गाउन पहनना चाहती थी पर श्री के ससुराल के रिश्तेदारों। के कारण उसे  साड़ी पहननी पड़ी ।

शादी के दो साल बाद, श्री को खबर मिली कि आखिरकार वह मातृत्व की दुनिया में प्रवेश कर रही हैं । उनके पति चाहते थे कि वह बच्चे के जन्म के बाद अपनी नौकरी जारी न रखें.श्री काम करना चाहती थी लेकिन उनकी मां और सास उनके फैसले के खिलाफ थीं। यहाँ तक कि उसकी बड़ी बहन भी कह रही थी कि वह इतनी खुशकिस्मत है कि माँ के रूप में अपने कर्तव्यों को निभाने का उसे मौका मिल रहा हैं । उसकी बहन के अनुसार उसे कोई अपराधबोध महसूस नही होगा जैसे  और कामकाजी महिलाओं को होता हैं। वो खुल कट अपने बच्चे की परवरिश कर सकती है.भ्रमित और निराश श्री ने आखिरकार उस नौकरी से इस्तीफा दे दिया जो उसकी पहचान थी,जिस नौकरी के कारण श्री, श्री थी।

नियत समय पर श्री ने एक प्यारी बेटी को जन्म दिया, वो मातृत्व से भीग गयी पर फिर भी एक घुटन थी, अपने वजूद से दूर होने की. श्री पूरे दिन घर में भागती थी लेकिन फिर भी उसे भाग्यशाली माना जाता था क्योंकि वह घर पर बैठ सकती थी। श्री का पति अपनी थका देने वाली नौकरी के कारण सप्ताहांत में एक ब्रेक चाहते था  इसलिए वह हफ़्ते भर की थकान उतारने के लिए  क्लबों और पब में जाता था. लेकिन श्री, वो तो पूरा दिन ही घर पर आराम करती थी।

किसी ने भी यह नहीं देखा कि शिशु के बाद उसकी दिनचर्या अधिक व्यस्त हो गई है। शांतिपूर्ण गहरी नींद अतीत की बातें हैं । जब तक यह आवश्यक नहीं है तब तक वह बच्चे के जन्म के बाद घर से बाहर कदम नहीं रखती थी.अपने साथ की सहकर्मियों को देखकर वो मन ही मन हीनभावना से ग्रस्त होने लगी।

दो साल बीत गए  और आज  फिर से श्री का जन्मदिन था, वह हमेशा की तरह सुबह जल्दी उठती है और लंबे समय के बाद, वल उस महिला को देखती है जो आईने के दूसरी तरफ थी. वह खुद की पहचान नहीं कर पा रही थी, वह महिला कहां थी जो हमेशा चुटकुले सुनाती थी, जिसकी आंखें सपनों से भरी थीं, कहाँ गयी वो टिमटिमाती  निर्दोष  आँखे, चमकदार त्वचा और चमकदार बाल?  उसने उस दिन फैसला किया बस अब कोई और बलिदान नहीं फिर से श्री की सलाह के बिना सत्या ने जन्मदिन की पार्टी का आयोजन किया लेकिन इस साल श्री ने रात का खाना तैयार करने से मना कर दिया. उसने अपने दो साल के बच्चे को सत्या के साथ छोड़ दिया, पार्लर चली गई और शाम को आश्वस्त श्री नई आशा और जीवन के साथ आयी, दूसरो के हिसाब से ज़िन्दगी जीते जीते वो एक घुटन में घिर गई थी पर आज एक फ़ैसले ने उसकी जिंदगी को फिर से रंगों से भर दिया।

हमारे समाज में अपने कैरियर का, अपनी नींद का, अपने दोस्तों का, अपने शौकों का बलिदान महिलायों से ही उपेक्षित किया जाता हैं.प्यार में डूबी हुई पत्नी, ममता में भीगी हुई माँ  बिना किसी शिकायत के एक के बाद एक  सब कुछ दूसरो की खुशी के लिए करती जाती हैं पर जब बच्चें ज़िन्दगी के अगले पड़ाव के लिए निकल पड़ते हैं तब वो ठगी हुई महसूस करती हैं । हर बार दूसरो की इच्छा को सर्वोपरि रखना और अपनी इच्छा को बार बार दबाना धीरे धीरे घुटन में परिवर्तित हो जाता हैं ।

यहाँ कुछ सुझाव दिए गए हैं जो एक महिला के रूप में आपको अपने जीवन में अपनाने चाहिए ताकि आपको अपने किसी भी निर्णय पर बाद में पछताना ना पड़े।

अपनो के लिए जो भी करे खुशी से करे पर ऐसा ना हो आपकी आज की परछाई आपके आने वाले कल पर पड़े, आप खुश रहेगी तो आपका परिवार भी खुश रहेगा।

हर किसी की गुड बुक्स में मत रहे: उन चीजों को ना कहना सीखें जो आपको पसंद नहीं हैं। यह संभव हो सकता है कि आपके ना कहना से दूसरा व्यक्ति दिनों या महीनों तक आपसे नाखुश रहे लेकिन अगर आप हर चीज के लिए हां कहेगी तो आप धीरे धीरे घुटने लगेगी.जिस बात से आप सहमत ना हो, उसके लिए अपने विचार जरूर व्यक्त करें. बार बार घुटने से अच्छा हैं आप एक बार बुरी बन जाये उनकी नज़रो में । यकीन मानिए अपने को खुश रखे ,आपके आस पास के लोग ख़ुद ही खुश रहेंगे ।

अपने आप से प्यार करें: एक महिला से यह अपेक्षा की जाती है कि वो अपने परिवार की देखभाल करें, उनके लिए छोटे छोटे त्याग करें, हाँ इसमें गलत क्या है, क्योंकि समाज के अनुसार यह हमारा कर्तव्य है । लेकिन एक बात कतई ना भूले कि दूसरों के लिए प्यार करने और त्याग करने में खुद को न खोएं ।

मुखर बने :  मौन हमेशा सुनहरा नहीं होती है, अगर आप कुछ पसंद नहीं कर रही  हैं तो संयमित परन्तु स्पष्ट बोले. यदि आप हर बार ऐसा महसूस करती हैं कि आपको हर निर्णय में अनदेखा किया जा रहा हैं तो आवाज उठाये. अपने विचारों को निडरता से व्यक्त करें. आप एक माँ, पत्नी आदि हैं, लेकिन आप पहले एक महिला भी हैं। इतनी घुटन और नकारात्मकता के साथ आप एक नए बीज को कैसे अंकुरित कर पाएगी, एक सकारात्मक पेड़ ही खुशहाल पौधे का पोषण  कर सकते हैं।

इट्स ओके नॉट टू बी ओके: कभी-कभी आप चिल्लाना या रोना चाहती हैं लेकिन आखिरकार आप एक मां हैं एक जननी आप ऐसे कैसे कर सकती हैं। अपने परिवार के लिए बलिदान देना आपका कर्तव्य नही है । यदि आप अपनी खुशी के लिए पार्लर जाना चाहती हैं तो जरूर जाए या आप मूवी मिस नहीं करना चाहती हैं, तो कृपया आगे बढ़ें और अकेले ही अपनी पसंदीदा मूवी देखने चली जाए। अगर घर पर कोई नही हैं तो बाहर से कुछ मदद लें  ,आप सुपर वीमेन बनने की कोशिश भूल कर भी ना करे। अगर आप खुश और संतुष्ट स्वयं ही नही हैं तो आपका परिवार  कैसे खुश रह सकता है।

स्पार्क को जीवित रखें: चाहे कोई भी स्थिति या परिस्थितियां हों, उन चीजों को करें जो आपके अंदर की  चिंगारी को जीवित रखने में मदद करती हैं । आप खरीदारी करके या रात में बाहर भोजन करके खुशी महसूस करती हैं तो अवश्य करे । अपने अंदर के बच्चे को कभी भी खोने ना दे।

नए नए कार्य सीखे और करे: किसी भी कार्य को करने या सीखने की कोई उम्र नही होती, जब जागो तभी सवेरा होता हैं. स्विमिंग या ड्राइविंग किसी भी उम्र में सीख सकते हैं । आप जब भी कोई नया कार्य सीखेगी तो अपने आप को उत्साह से ओतप्रोत पाएंगी ।

ऋतु वर्मा

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