साष्टांग प्रणाम क्यों वर्जित है स्त्रियों के लिए ?
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साष्टांग प्रणाम क्यों वर्जित है स्त्रियों के लिए ?

साष्टांग प्रणाम

पद्भ्यां कराभ्यां जानुभ्यामुरसा शिरसतथा।

मनसा वचसा दृष्टया प्रणामोअष्टाड्ग मुच्यते।।

साष्टांग प्रणाम का अर्थात है व्यक्ति किसी को यदि सिर, हाथ, पैर, हृदय, आँख, जाँघ, वचन और मन इन आठों को मिलाकर सीधा जमीन पर लेट कर प्रणाम करे तो उसको साष्टांग प्रणाम बोलते है। साष्टांग प्रणाम करने में ठोढ़ी, छाती, दोनों हाथ, दोनों घुटने और पैर अर्थात् व्यक्ति का पूरा शरीर पैरों से लेकर सिर तक जमीन का स्पर्श करता है। साष्टांग प्रणाम करते समय पेट का स्पर्श जमीन पर नहीं होना चाहिए।

प्रणाम करने के 6 प्रकार है जैसे 1. सिर झुकाना, 2. हाथ जोड़ना, 3. दोनों एक साथ सिर झुकाना और हाथ जोड़ना, 4. हाथ जोड़ना और दोनों घुटने झुकाना, 5. हाथ जोड़ना, दोनों घुटने झुकाना और सिर झुकाना या 6. दंडवत प्रणाम अर्थात् साष्टांग प्रणाम इन 6 प्रकार के नमस्कारों से प्रणाम किया जाता है। ये सभी प्रणाम व्यक्ति को धार्मिक बनाते है, इन 6 प्रकार के प्रणाम करने से व्यक्ति को जीवन सार्धक होता है उसके कर्म सुधरते है किन्तु साष्टांग प्रणाम स्त्रियों को नहीं करना चाहिए क्योंकि साष्टांग प्रणाम करने से स्त्री का शरीर जमीन को स्पर्श करेगा जबकि स्त्री का गर्भ और उसके वक्ष कभी जमीन से स्पर्श नहीं होने चाहिए क्योंकि उसका गर्भ एक जीवन को सहेजकर रखता है उसके गर्भ से ही सृष्टि का चक्र चलता है यहीं से मानव की उत्पत्ति होती है और उसके वक्ष से जीवन को पोषण मिलता है। बच्चे का शरीर गर्भ में बनता है और 9 माह तक गर्भ में ही उसका जीवन होता है। बाहर आने के पश्चात् माँ के दूध से उसका पालन होता है इसी कारण महिलाओं को कभी साष्टांग प्रणाम नहीं करना चाहिए।

ज्योतिर्विद बॉक्सर देव गोस्वामी

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