बाईं करवट क्यों लेटना चाहिए ?
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बाईं करवट क्यों लेटना चाहिए ?

भोजन करने से शरीर में शक्ति का संचार होता है और शरीर चलता है। भोजन करने के पश्चात् शरीर के अन्दर भोजन को पचाने की क्रिया चलती है इसलिए भोजन करने के बाद कम-से-कम 100 कदम चलना चाहिए क्योंकि शास्त्रों में लिखा हैः- भुक्त्वा शतपदं गच्छेत्। अर्थात् भोजन करने के पश्चात् 100 कदम चलना चाहिए इस क्रिया को शतपावली कहते है। शतपावली के बारे में आयुर्वेद कहता हैः-

भुक्त्वोपविशतः स्थौल्यं शयानस्य रूजस्थता। आयुश्चक्रमाणस्य मृत्युर्धावितधावतः।।

अर्थात् भोजन करने के बाद एक ही जगह बैठे रहने से स्थूलत्व आता है। जो व्यक्ति भोजन करने के बाद चलता है, उसकी आयु में वृद्धि होती है। जो भोजन करने के बाद दौड़ता है या भागता है उसकी मृत्यु समीप आती है। इसलिए भोजन के बाद शतपावली करनी चाहिए और शतपावली के पश्चात् बाईं करवट लेटना चाहिए।

बाईं करवट लेटने के पीछे का रहस्य है कि भोजन का कुछ देर जठर में ही रहना शरीर के लिए पथ्यकारक होता है। जठर के आकुंचन-प्रसारण के कारण अन्न तरल होकर अगले मार्ग में प्रविष्ट होता है जिसके कारण पाचन क्रिया अच्छी तरह से होती है। जठर के अगले हिस्सें में पूरा भोजन जाने पर उसकी बाईं ओर स्थित आकुंचन-प्रसारण वाली जगह पर ग्रहण किए हुए भोजन का दबाव पड़ता है। दाईं ओर सोने से यह दबाव नहीं पड़ता।

बाईं नासिका से सूर्य नाड़ी ‘पिंगला’ एवं दाईं नासिका से चंद्र नाड़ी ‘इड़ा’ बहती रहती है। दाईं करवट लेने से ‘पिंगला’ एवं बाईं करवट लेने से ‘इड़ा’ प्रभावित होती है। भोजन पाचन के लिए पिंगला का स्वर चलना अत्यंत आवश्यक होता है इसलिए भोजन करने के बाद कम से कम 24 मिनट या 1 घंटा बाईं करवट लेटना चाहिए।

– ज्योतिर्विद बॉक्सर देव गोस्वामी

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