महिलाएं क्यों भरती है मांग में सिंदूर
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महिलाएं क्यों भरती है मांग में सिंदूर ?

‘सुमंगली क्रिया’ अर्थात् वर द्वारा वधू की मांग में सिंदूर भरने का संस्कार ‘सुमंगली क्रिया’ कहलाता है। विवाह के समय वर प्रथम बार कन्या की मांग में चांदी के सिक्के से सिंदूर लगाता है, यह सिंदूर माथे से लगाना आरंभ करके जितनी लंबी मांग हो उतना भरा जाना चाहिए, उसके पश्चात् वह कन्या सुहागिन स्त्री का रूप धारण कर लेती है और जब तक उसका पति जीवित है तब तक सुहागिन स्त्री अपनी मांग में सिंदूर लगाती है। स्त्री का अपनी मांग में सिंदूर लगाना जहां उसके सौंदर्य में वृद्धि करता है वहीं मांग में भरा हुआ सिंदूर उसके सुहागिन होने का परिचायक होता है।

स्त्री का शरीर बहुत कोमल होता है और भारतीय संस्कृति और सभ्यता के सभी हिन्दू त्यौहारों का भार स्त्री के ऊपर ही स्थापित है, यहां तक की हिन्दू धर्म, त्यौहार, या किसी भी प्रकार का मांगलिक कार्यक्रम स्त्री के बिना पूर्ण नहीं हो सकता। विवाह के पश्चात् स्त्री के ऊपर गृहस्थी चलाने का भार भी बढ़ जाता है, गृहस्थी में प्रेम भावना एवं सामंजस्य बना रहे इसलिए मांग में सिंदूर भरा जाता है क्योकि मांग में भरा हुआ सिंदूर माथे और मस्तिष्क के चक्रों को सक्रिय बनाए रखता है जिसके द्वारा स्त्री में मानसिक शांति बनी रहती है।

सामुन्द्रिक शास्त्र के अनुसार जहां सिंदूर भरा जाता है वह स्थान ब्रह्मरंथ्र और अध्मि नामक मर्मस्थान के ठीक ऊपर होता है, वहां सिंदूर लगाने से बाहरी बुरे प्रभावों को स्त्री के शरीर में प्रवेश करने से रोकता है। यदि सुहागिन स्त्री प्रतिदिन अपनी मांग में सिंदूर लगाती है तो उसके चहरे पर कभी झुर्रियां नहीं पड़ती क्योंकि सिंदूर में पारा जैसी धातु होती है जो स्त्री के शरीर में स्थित विद्युतीय उत्तेजना नियंत्रित करता है। पारा शरीर को ठंडक पहुंचाने का कार्य भी करता है जिसके द्वारा शरीर को आराम मिलता है।

मांग में प्रतिदिन सिंदूर भरने से स्त्री के शरीर के चारों ओर उसके पतिव्रता की शक्ति का संचार होने लगता है और जिस स्त्री की भृकुटी केन्द्र में नागिन रेखा दिखाई देती है वह स्त्री अभागिनी मानी जाती है, इस अभागिनी दोष के निवारण हेतु स्त्री को अपनी मांग में प्रतिदिन सिंदूर लगाना चाहिए।

सिंदूर यौन इच्छा की भावना को जगाता है इसलिए कुंवारी कन्या और विधवा स्त्री को अपनी मांग में सिंदूर नहीं भरना चाहिए उनके लिए सिंदूर मांग में भरना निषेध होता है। वहीं सुहागिन स्त्री के द्वारा अपनी मांग में सिंदूर लगाना उसके पति को समाज में मान-सम्मान दिलाता है यदि समाजिक दृष्टि से देखा जाये तो मांग में सिंदूर भरना, स्त्री द्वारा अपने पति के प्रेम का प्रतीक होता है।

ज्योतिर्विद बॉक्सर देव गोस्वामी   

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