अनुपम माधुरी जोरी श्रीकृष्ण भजन
भजन संग्रह

अनुपम माधुरी जोरी (श्रीकृष्ण भजन )

अनुपम माधुरी जोरी,

हमारे श्याम श्यामा की॥

रसीली रसभरी अखियाँ ,

हमारे श्याम श्यामा की॥

 

कटीली भोंहे अदा बांकी,

सुघर सूरत मधुर बतियाँ

लटक गर्दन की मन बसियाँ,

हमारे श्याम श्यामा की

रसीली रसभरी अखियाँ ,

हमारे श्याम श्यामा की॥

अनुपम माधुरी जोरी,

हमारे श्याम श्यामा की ॥

 

मुकुट और चन्द्रिका माथे,

अधर पर पान की लाली

अहो कैसी बनी छवि है,

हमारे श्यामश्यामा की

रसीली रसभरी अखियाँ ,

हमारे श्याम श्यामा की॥

अनुपम माधुरी जोरी,

हमारे श्याम श्यामा की ॥

 

परस्पर मिलके जब विहरें,

श्री वृन्दावन के कुन्जो में

वही पर नित बने शोभा,

हमारे श्याम श्यामा की

रसीली रसभरी अखियाँ ,

हमारे श्याम श्यामा की॥

अनुपम माधुरी जोरी,

हमारे श्याम श्यामा की ॥

नही कुछ लालसा धन की,

नही निर्वाण की इच्छा

सखी श्यामा को हो दर्शन ,

दया हो श्याम श्यामा की

रसीली रसभरी अखियाँ ,

हमारे श्याम श्यामा की॥

अनुपम माधुरी जोरी,

हमारे श्याम श्यामा की॥

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