हे कान्हा कृष्ण भजन
भजन संग्रह

हे कान्हा (कृष्ण भजन)

प्रीत की लत

मोहे ऐसी लागी।

हो गई मैं मतवारी॥

बल-बल जाऊं

अपने पिया को।

हे मैं जाऊं वारी-वारी……

मोहे सुध बुध ना रही

तन मन की।

ये तो जाने दुनिया सारी॥

बेबस और लाचार

फिरूं मैं।

हारी मैं दिल हारी॥

हारी मैं दिल हारी……

तेरे नाम से जी लूं।

तेरे नाम से मर जाऊं॥

तेरी जान के सदके में ।

कुछ ऐसा कर जाऊं……

तूने क्या कर डाला।

मर गयी मैं,

मिट गयी मैं॥

हो जी हाँ जी।

हो गयी मैं॥

तेरी दीवानी……

इश्क जुनूं जब

हद से बढ़ जाए।

हंसते-हंसते आशिक

सूली चढ़ जाए॥

इश्क का जादू

सर चढ़कर बोले।

खूब लगा लो पहरे

रस्ते रब खोले……

यही इश्क की मर्ज़ी हैं।

यही रब की मर्ज़ी हैं॥

तेरे बिन जीना कैसा।

हाँ खुदगर्जी है॥

तूने क्या……

हे मैं रंग रंगीली दीवानी।

हे मैं अलबेली मैं मस्तानी॥

गाऊं, बजाऊं,

सबको रिझाऊं।

हे मैं दीन धर्म से बेगानी॥

हे मैं दीवानी,

मैं दीवानी॥

तेरे नाम से……

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