पावनता 
काव्य और कविताएं

पावनता 

नहर का नीला पानी लगा मुझे चिरयात्री आया पहाड़ों से चलता रहा है निर्बाध थकान भी नहीं है ऊबा भी नहीं सफर से जाना भी है बहुत दूर चला जा रहा है चुपचाप गतिशीलता ने रखी है महफूज इसकी पावनता अगर ये कहीं ठहर जाता किसी तालाब में तो खो देता अपनी पावनता     […]

ज़िन्दगी के सफर में
काव्य और कविताएं

ज़िन्दगी के सफर में

खुदा इस पापी पर अपना करम रखना, ज़िन्दगी के सफर में थोड़ा सा मरम रखना,   गरूर-ओ-तकबीर मेरी ज़िन्दगी में ना आये, अपनी दया से मेरा दिल नरम रखना,   लालच-ओ-हवस मेरे करीब ना आने पाये, मेरी आँखों मे सदा हया-ओ-शरम रखना,   हर इम्तिहान में मुझे साबित क़दम रखना, सिर्फ इंसानियत मेरा दीन-ओ-धरम रखना, […]

उड़ान बुजुर्गों से
काव्य और कविताएं

बुजुर्गों से

मिला है सुंदर रंगों का, ज्ञान बुजुर्गों से। और मिली है पंखों में, उड़ान बुजुर्गों से। ये तो अपने परिवारों की आधारशिलाए हैं,  मिली पीढ़ियों की हम को, पहचान बुजुर्गों से॥    हमको मिलते सुंदर, संस्कार बुजुर्गों से। हमने पाया घर समाज, परिवार बुजुर्गों से। बिन मां बाप के अपना, अस्तित्व नहीं कोई, मिला संस्कृति […]

शहर
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शहर

न सहर है  न शाम है। काफिर की पिटाई सरेआम है॥   न दंगे है न लड़ाई है। हमारे शहर में कत्लेआम है॥   न दोस्त हैं न दुश्मन है। फिर ये कैसा इंतकाम है॥   न भजन है न आज़ान है। हमारी बस्ती में कोहराम है॥   न सुख है न सुविधा है। हमारे […]

दिवानगी
काव्य और कविताएं

दिवानगी

किसी के दिल का नगमा हमसे रुठ जाता है, मनाये हम जब उसको फिर वो मान जाती है। कैसे बतलाऊ उसको हमे तुम्हारी खबर है, मगर आज कल मुझसे वो बेखबर रहती है॥   किसी के दिल कि मदहोशी हमे बेहोश करती है, खुलते है राज जब हमें वो खामोश करती है। हमने किया था […]

भूमिका
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भूमिका

तुम बखूब निभा सकते हो स्वयं की भूमिका लेकिन अफसोस तूने खो दिया स्वयं का व्यक्तित्व औरों की भूमिका अदा करने में कभी तुम पर हावी रहा धर्मगुरुओं का व्यक्तित्व राजनेताओं का व्यक्तित्व या किसी अन्य प्रभावशाली का व्यक्तित्व कर दी तूने हत्या स्वयं के व्यक्तित्व की निभाते-निभाते औरों की भूमिका -विनोद सिल्‍ला

अच्छे संस्कार
काव्य और कविताएं

अच्छे संस्कार

 जीवन में सदैव साथ निभाते हैं, अच्छे संस्कार।  माता पिता के संग परिवार देता  है,अच्छे संस्कार॥   रहे देश में या फिर कोई, चाहे जाए विदेश में, पहने शालीन पहनावा या फिर कोई भेष में। हल ढूंढ कर सजग बनाते हैं, अच्छे संस्कार॥   कोई मिले मृदुभाषी या कोई कटुता से बोले, मीठी मीठी बात […]

अनुपम माधुरी जोरी श्रीकृष्ण भजन
भजन संग्रह

अनुपम माधुरी जोरी (श्रीकृष्ण भजन )

अनुपम माधुरी जोरी, हमारे श्याम श्यामा की॥ रसीली रसभरी अखियाँ , हमारे श्याम श्यामा की॥   कटीली भोंहे अदा बांकी, सुघर सूरत मधुर बतियाँ लटक गर्दन की मन बसियाँ, हमारे श्याम श्यामा की रसीली रसभरी अखियाँ , हमारे श्याम श्यामा की॥ अनुपम माधुरी जोरी, हमारे श्याम श्यामा की ॥   मुकुट और चन्द्रिका माथे, अधर […]

रुहानी गज़लों का संग्रह है इशरते कत़रा
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रुहानी गज़लों का संग्रह है “इशरते कत़रा”

देशवाल राघव जी की गजलें है जिसमें प्रेम का अल्हड़पन एवं शोख अदाओं के साथ गरीबों का दर्द भी मिला है। ” दिन व रात कोल्हू में पेला है खुद को  कुनबे का सामान जुटाने की खातिर” इटावा के चंद्र स्वरूप बिसारिया एक अवकाश प्राप्त वैज्ञानिक हैं परंतु उनकी गज़लों में एक घायल प्रेमी के […]

मेरे प्यारे मेरे बिहारी जू श्रीकृष्ण भजन
भजन संग्रह

मेरे प्यारे मेरे बिहारी जू (श्रीकृष्ण भजन )

एक तेरी, साँवरी सूरत से, बस हो ही गया है, प्यार मुझे, खा करके, ज़माने की ठोकर, एक तूँ ही मिला, दिलदार मुझे, मेरे इस, उजड़े गुलशन की, अब तक न मिली है, बहार मुझे, ओ नन्द लाला, अब देर न कर, झट से दिखला, दीदार मुझे, हो मुरली वाले, यार तेरा, हो कमली वाले, […]