ममता और प्रेम का रिस्ता ।
काव्य और कविताएं

ममता और प्रेम का रिस्ता।

ममता में माँ झलकती है, प्रेम में जग है तड़पता।
प्रेम में भगवान बसता जो माँ की ममता को है तरसता ।।

अग्नि में भी शीतलता देती है ममता।
प्रेम तो विरह और वियोग में है पनपता।।

कोख से ही उदगम् हो जाती है ममता।।
प्रेम तो प्रियतम की राह में है भटकता।

बच्चा बुढ़ा बन जाये तो भी माँ को होती है ममता।
प्रेम तो प्रियतम के मिलन का आधार है दर्शाता।।

बच्चे को अपना जीवन समपर्ण कर देती है ममता।
प्रेम तो आत्मसत् की भावना हृदय में है जगाता।।

लाखों अपराध माफ कर बददुओं को दुआ बनाती है ममता।
प्रेम तो प्रभु का, जन्म-मरण से छुटकारा है दिलाता।।

ज्योतिर्विद बॉक्सर देव गोस्वामी

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