समय का पहिया,
काव्य और कविताएं

समय का पहिया

समय का पहिया चला जा रहा,
ये साल बीता चला जा रहा।।

किसकी खुशियों को बाँटा है हमने,
किसके ग़मों को साझा किया है,
ये भी हमको बता जा रहा,
समय का पहिया चला जा रहा।।

किसने जख्म कुरेदे हमारे,
किसने घावों पे मलहम लगाई,
ये भी हमको बता जा रहा,
समय का पहिया चला जा रहा।।

किसने शतरंज की बाजी बिछाई,
किसने जीत हमें है दिलाई,
ये भी हमको बता जा रहा,
समय का पहिया चला जा रहा।।

है सुख-दुःख तो ईश्वर का खेला,
ये दुनिया तो है एक मेला,
ये भी हमको बता जा रहा,
ये साल बीता चला जा रहा।।

कितनी सामाज सेवा की हमने,कितने हाथ हैं अपने बढ़ाये,
किसको छोड़ा है बेसहारा,ये भी हमको बता जा रहा,
समय का पहिया चला जा रहा।।

– साधना छिरोल्या

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