वैष्णो देवी माँ का भजन
भजन संग्रह

भवानी तेरे दर को छोङ कर किस दर जाऊं मै (माता भजन)

भवानी तेरे दर को छोङ कर किस दर जाऊं मै
भवानी तेरे दर को छोङ कर किस दर जाऊं मै

जब से याद भुलाई तेरी लाखो कष्ट उठाये हैं
माँ लाखों कष्ट उठाये हैं
क्या जानू इस जीवन अन्दर,कितने पाप कमाऐं हैं
कितने पाप कमांये हैं
अब हुँ शर्मिदा आप से क्या बतांऊ मै
भवानी तेरे दर को छोङ कर किस दर जाऊं मै

भवानी तेरे दर को छोङ कर किस दर जाऊं मै….

तू है अम्बे वरों की दाती तुझ से सब वर पाते हैं
तुझ से सब वर पाते हैं
ऋषि मुनि और योगी सारे तेरे ही गुण गाते हैं
तेरे ही गुण गाते हैं
अब छींटा दे दो प्यार का होश में आऊं मैं
भवानी तेरे दर को छोङ कर किस दर जाऊं मैं

भवानी तेरे दर को छोङ कर किस दर जाऊं मै….

मेरे पाप कर्म ही तुझ से प्रीती ना करने देते हैं,
प्रीति ना करने देते हैं
कभी जो चाहूँ मिलु आप से रोक मुझे ये देते हैं
रोक मुझे ये देते हैं
फिर कैसे अम्बे आप के दर्शन पाऊं मैं
भवानी तेरे दर को छोङ कर किस दर जाऊं मैं

भवानी तेरे दर को छोङ कर किस दर जाऊं मै….

जो बीती सौ बीती लेकिन बाकी उमर संभालूं मैं
बाकी उमर सभांलु मैं
प्रेम पाश में फसा भवानी भेटं प्रेम की गाँ लू मैं
भेटं प्रेम की गाँ लू मैं
अब सुनता मेरी कौन है किसे सुनाऊ मैं,
भवानी तेरे दर को छोङ कर किस दर जाऊं मैं

भवानी तेरे दर को छोङ कर किस दर जाऊं मै
भवानी तेरे दर को छोङ कर किस दर जाऊं मै

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