कुछ गिरधर कहता है
भजन संग्रह

कुछ गिरधर कहता है, राधारानी भजन

रे! बात यही है सुन
कुछ गिरधर कहता है
राधे दिल में तेरे
इक नागर रहता है।

ऋतु राज यहाँ पर क्यों है
आज मगन इतना
हम एक हुए जब से
ख़ुशहाल चमन कितना।
इक पीर हृदय की
जो राधा बिन सहता है।
रे! बात यही है सुन
कुछ गिरधर कहता है।

बरज़ोर किशन प्यारे
मत छेड़ मुझे ऐसे
मैं कोमल सी बच्ची
कर स्नेह मुझे वैसे
कर थाम किशन मेरे
क्यों ऐसे गहता है।
रे! बात यही है सुन
कुछ गिरधर कहता है।

मदमस्त पवन लेकर
जो आज महक आयी
छू कर उर को
मेरे राधे फिर हर्षाई
चंचल मन को लेकर
हो प्रेमिल बहता है
रे! बात यही है सुन
कुछ गिरधर कहता है।

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